1125 HAIGAS PUBLISHED TILL TODAY(04.09.15)......आज तक(04.09.15) 1125 हाइगा प्रकाशित Myspace Scrolling Text Creator

यदि आप अपने हाइकुओं को हाइगा के रूप में देखना चाहते हैं तो हाइकु ससम्मान आमंत्रित हैं|

रचनाएँ hrita.sm@gmail.comपर भेजें - ऋता शेखर ‘मधु’

Saturday, 15 February 2014

धूप खिली है - हाइगा में

आज हमारे साथ जुड़ रही हैं सुपरिचित हाइकुकार आदरणीया सीमा स्मृति जी...धूप का आना...पंछियों का चहचहाना...इसी विषय पर देखते हैं उनके सुन्दर हाइकु हाइगा की नजर से|
हाइकु भेजने के लिए सीमा जी का हार्दिक आभार|








सारे चित्र गूगल से साभार

Tuesday, 11 February 2014

चित्र एक -हाइगा अनेक

फेसबुक के ग्रुप साहित्यिक मधुशाला-हाइकु कार्यशाला पर हरेक सप्ताह 'इवेंट' का आयोजन होता है जिसमें सभी वरिष्ठ एवं नवोदित हाइकुकार प्रसन्नतापूर्वक भाग लेते हैं...फरवरी के दूसरे सप्ताह में बसंत इवेंट का आयोजन किया गया  जिसमें मेरे द्वारा प्रेषित चित्र पर कुछ रचनाकारों ने हाइगा बनाया और कुछ ने चित्र के भाव के अनुसार हाइकु प्रेषित किए ...प्रस्तुत है हाइकुकार मित्रों द्वारा प्रेषित हाइगा...
१.

२.ज्योतिर्मयी पन्त जी
हैं ऋतुराज
रूप रस सुगंध
निखरे आज |

३. रीना मौर्य जी

४. रेखा नायक रानो जी



५. राजीव गोयल जी



६. सुरेश चौधरी जी


७. विभा श्रीवास्तव जी





Tuesday, 4 February 2014

आशाओं की कस्तूरी - हाइगा में

दौड़ाती रही
    आशाओं की कस्तूरी
    जीवन भर ||

आदरणीय त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी के हाइकुओं को देखिए हाइगा के रूप में...हाइकु भेजने के लिए आ०ठकुरेला जी का आभार !!
हाइकु में भाव और सार्थकता का सम्मिश्रण हो तो हाइगा के रूप खिल जाते हैं | सिर्फ  कटाक्ष या उपदेश काव्य की दृष्टि से भावपूर्ण नहीं माने जाते |






सारे चित्र गूगल से साभार

Sunday, 2 February 2014

''आधी आबादी का आकाश'' -हाइकु संग्रह

अनीता कपूर जी एवं रचना श्रीवास्तव जी द्वारा सम्पादित हाइकु संग्रह ''आधी आबादी का आकाश'' जल्दी ही विश्व पुस्तक मेले में होगा , अनीता जी और रामेश्वर कम्बोज 'हिमांशु' सर की तहे दिल से आभारी हूँ जिन्होमे मुझे भी इस संकलन में स्थान दिया है। आधी आबादी के नाम से विश्व की चुनिंदा ६२ महिलाओ को इसमें शामिल किया गया है ---




Monday, 20 January 2014

मन के द्वार हजार---समीक्षा- ऋता शेखर 'मधु'



मन के द्वार हजार---समीक्षा- ऋता शेखर 'मधु'
ईश्वर की अनुपम कृति है मनुष्य और मनुष्य की अनुपम अनुभूति है मन| अनुभूति की अनुपम अभिव्यक्ति है भाषा| भाषा शब्दों की वह शैली है जो मन के करीब होती है और दिल की गहराइयों में उतर जाती हे| सद्य प्रकाशित पुस्तक 'मन के द्वार हजार' सिद्धहस्त हाइकुकार रचना श्रीवास्तव जी की पुस्तक है जिसमें उन्होंने हिन्दी हाइकु का अवधी भाषा में अनुवाद किया है| अवध, जहाँ मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम जी ने सतयुग में राज्य किया था, वहाँ की भाषा भी मीठी मर्यादित है इसे सभी पाठक पुस्तक पढ़कर महसूस कर सकेंगे| हिन्दी भाषा के हाइकुओं का अवधी भाषा में अनुवाद कर कवयित्रि रचना जी ने भाषा पर अपनी पकड़ एवं लेखन की विस्तृता का अद्भुत परिचय दिया है| इस पुस्तक में रचना जी ने ३४ हाइकुकारों के कुल ५४२ हाइकुओं को अवधी में सफलतापूर्वक रुपांतरित किया है| इस ऐतिहासिक महत्व के कार्य के लिए रचनाकार रचना जी कोटिशः बधाई की पात्र हैं|
अब पढ़ते हैं उनके द्वारा अनुवादित कुछ हाइकु जो रचना जी की रचनाधर्मिता एवं सामर्थ्य सहज ही उद्धृत करेगा| प्रस्तुत है पुस्तक में शामिल  सभी ३४ रचनाकारों के एक हाइकु का अवधी रुपांतरण जिसे रचना जी की लेखनी का सुखद स्पर्श मिला है...

१) डॉ भगवत शरण अग्रवाल-
धन्य बरखा/ खेतवा मा कविता/ बोवे किसान

२) डॉ सुधा गुप्ता-
दियवा लागे/ घटिया मा खिलत/ डैफोडिल हैं

३) डॉ रमाकान्त श्रीवास्तव-
केकर पीरा/ बनिके घटा छाई/ मेघवा घिरा

४) डॉ सतीशराज पुष्करणा-
हँसा ऐ दोस्त/ रोये से ई रतिया/ छोट न होई

५) डॉ मिथिलेश दीक्षित-
नवा साल कै/ उठनवा नवा हो/ खुसियो नवा

६) डॉ उर्मिला अग्रवाल-
याद पिजरा/ तरपत रहत/ मन सुगवा

७) रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'-
मईया याद/ मन्दिर के दियवा/ जरे हमेसा

८) डॉ भावना 'कुँअर'-
बुझै सागर/ सुरज ठनढाय/ जरत चाँद

९) डॉ हरदीप कौर सन्धु-
बिटियन से/ घरवा गुलसन/ खिलै अँगना

१०) पूर्णिमा बर्मन-
देस हमरा/ सबहिं को पियारा/ ज़िन्दगियो से

११) रचना श्रीवास्तव-
चैन से सोवे/ अचरवा के छाँव/ माई जे जागे

१२) सुदर्शन रत्नाकर-
बहुते हेरा/ मकनवा मिला/ घरवा नाही

१३) कमला निखुर्पा-
काहे चुप है/ बरगदवा बाबा/ दढीया बढी

१४) प्रियंका गुप्ता-
होंठवा हँसी/ देखियु के समझे/ मन कै पीरा

१५) डॉ जेन्नी शबनम-
गोड़वा जख्मी/ रहिया मा कँटवा/ कहवाँ जाईं

१६) सुभाष नीरव-
दुख गहिरा/ पियवा मिलन पै/ कब ठहिरा

१७) डॉ अनीता कपूर-
रात बिछौना/ सपन के तकिया/ निंदिया सौत

१८) मंजु मिश्रा-
अनेकों भासा/ हमरे देसवा म/ तब्बो है एक

१९) मुमताज टी एच खान-
मन-बगिया/ खुसबू फैईरावै/ मिठ बोलिया

२०) डॉ अमिता कौण्डल-
अखिया सून/ धुआ भै सपनवा/ इहै गरीबी

२१) ऋता शेखर 'मधु'-
पनिया गिरे/ उडै सोंध खुसबू/ धोई धरती

२२) डॉ श्याम सुन्दर 'दीप्ति'-
रहिया मिले/ पाथर इठाई के/ पुल बनायो

२३) सीमा स्मृति-
काहे हमेसा/ अनहोनी के डर/ उमरि भर

२४) डॉ ज्योत्सना शर्मा-
गहरी पीरा/ मेघवा कै मनवा/ टूटी जाति बा

२५) सुशीला शिवराण-
काहे बिटिया/ बहु 

२६) अनीता ललित-
उमंगिया मा/ पिरेम उजास मा/ दोस्ती कै बास

२७) डॉ आरती स्मित-
पतवा झरे/ दुखी नाही होइया/ फूल खिलिहें

२८) कृष्णा वर्मा-
फुलवा पटी/ बगिया के कियारी/ गंध ठुमकी

२९) तुहिना रंजन-
दुखवा भारी/ मछरी परेसान/ गन्दा पनिया

बाल हाइकुकारौं के हाइकुओं के भी अनुवाद किया है रचना जी ने-
३०) सुप्रीत सन्धु-
मुस्किल आवे/ रौसनी कै मिनार/ बनत माई

३१) ऐश्वर्या कुँअर-
बरखा आवै/ सागर मा नहावै/ ई डूबै जाये

३२) ईशा रौहतगी-
आवत-जात/ दुख अउर सुख/ इहै जिन्नगी

३३) अन्वीक्षा श्रीवास्तव-
आपन पंख/ तितली फैहरावै/ आकास रंगे

३४) इला कुलकर्णी-
माई रोवत/ तुहें याद कैई के/ हमहू रोई

पाठक यह अवश्य महसूस करेंगे कि रचना जी ने अनुवाद में हाइकु के मूल भाव को समेटते हुए लय और प्रवाह का भी पूरा ख्याल रखा हे| भविष्य में भी कवयित्रि अपनी लेखनी से हाइकु के क्षेत्र में अनुपम योगदान देती रहेंगी, इसी आशा और विश्वास के साथ शुभकामनाएँ !!

Monday, 23 December 2013

ख़्वाब ढले - हाइगा में

ख़्वाबों ने कुछ ख़्वाब बुने
ख़्वाबों ने कुछ फूल चुने
हाइगा में हैं ख़्वाब ढले|






सारे चित्र गूगल से साभार

Sunday, 1 December 2013

हमारे गाँव - हाइगा में

आज हिन्दी हाइगा में शामिल हो रहे हैं ''कुमार गौरव अजीतेन्दु'' जी जिन्होंने गाँव के खूबसूरत एहसासों को हाइकु में बड़ी सुन्दरता से पिरोया है...हाइगा के रूप में उनके ख्याल प्रस्तुत हैं...आपकी टिप्पणियों के इन्तेज़ार में...शुभकामनाएँ !!
कुमार गौरव अजीतेन्दु
सिंहनाद-गौरव जी का ब्लॉग










सारे चित्र गूगल से साभार